बिजली की खोज किसने कि?| Bijali ka Avishkar Kisne Kiya 2021

बिजली की खोज किसने कि थी: आज के युग में बिजली के बिना किसी भी जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है। बिजली आज के समय में सभी के लिए काफी महत्वपूर्ण आवश्यकता बन गया है। बिजली किसी भी व्यक्ति की दैनिक उपयोगिताओं से देश की त्वरित विकास महत्वपूर्ण आवश्यकता में से एक बन कर रह गया है।

विद्युत किसी के आर्थिक विकास के लिए आधारभूत संरचना को विकसित करने का एक महत्वपूर्ण योगदान होता है। परंतु क्या आपको इस बात का पता है की बिजली की खोज किसने की थी एवं कैसे की थी? यदि आपको इस बात का पता नहीं है तो चलिए हम जानते हैं कि बिजली की खोज किसने एवं कैसे की

बिजली का संक्षिप्त इतिहास

लोगों द्वारा यह अनुमान लगाया गया है कि 600 ईसा पूर्व पहले बिजली की खोज वैज्ञानिकों द्वारा की गई थी परंतु बिजली का जैसा स्वरूप हमारे सामने आज है वह एक क्रमिक विकास का परिणाम है। बिजली के विभिन्न यंत्र जैसे टेलीफोन रेडियो पंखा बल्ब इत्यादि जिस पर आज पूरी दुनिया निर्भर है इसका निर्माण 2500 वर्ष बाद कृत्रिम रूप से मानव द्वारा किया गया।

यूनान के एक महान दार्शनिक एवं भौतिक विज्ञानी थेल्स को सबसे पहले जब यह पता चला कि चीड़ के वृक्ष का सढ़कर जमने वाला रस या गोंद को जब कपड़े पर लगाते हैं तो उसमें पंख या सूखे पत्ते आदि को अपनी और आकर्षित करने की क्षमता उत्पन्न हो जाती है। अंबर को यूनानी भाषा में इलेक्ट्रॉन कहते हैं इसी वजह से थेल्स ने आकर्षित करने की क्षमता को इलेक्ट्रिसिटी नाम दिया और यही शब्द बिजली के लिए भी उपयोग में लाया जाने लगा।

हल्की वस्तुओं को अपनी और आकर्षित करने का जो गुण में घर्षण क्रिया से उत्पन्न हुआ था इस प्रकार से उत्पन्न विद्युत को घर्षण विद्युत भी कहते हैं। आवेश के इलेक्ट्रॉनिक सिद्धांत के आधार पर घर्षण विद्युत की व्याख्या की गई है। इस सिद्धांत के अनुसार प्रत्येक पदार्थ परमाणुओं से मिलकर ही बना हुआ होता है। परमाणुओं के केंद्रीय भाग में प्रोटोन उदासीन का न्यूट्रॉन एवं धन आवेशित कण उपस्थित होते हैं। केंद्रीय भाग अथवा नाभिक के चारो और आवेशित इलेक्ट्रॉन हमेशा चक्कर लगाया करते हैं। परमाणुओं में इलेक्ट्रॉन तथा प्रोटोन की संख्या बराबर होती है एवं धन आवेश या ऋण आवेश की उपस्थिति के बावजूद परमाणु अक्सर विद्युतीय रूप में उदासीन होते रहते हैं।

परंतु जब किसी एक पदार्थ को दूसरे पदार्थ से रगड़ा जाता है तो पहले वाले पदार्थ से इलेक्ट्रॉन निकल कर दूसरे पदार्थ में चला जाता है। जिस पदार्थ से इलेक्ट्रॉन निकाल कर दूसरे पदार्थ में जाता है उस पदार्थ में इलेक्ट्रॉन की कमी आ जाती है फल स्वरूप वह पदार्थ धन आवेशित वस्तु की तरह व्यवहार करने लगता है। जिस पदार्थ में इलेक्ट्रॉन जाते हैं उस पदार्थ में इलेक्ट्रॉन की अधिकता हो जाती है जिस वजह से ऋण आवेशित वस्तु की तरह वह पदार्थ व्यवहार करने लगता है।

बिजली की खोज किसने कि
बिजली की खोज किसने कि

बिजली की खोज किसने कि थी

थेल्स की खोज के 2000 वर्ष के बाद एक और वैज्ञानिक विलियम गिलबर्ट ने इस बात का पता लगाया की अंबर के अतिरिक्त और भी कई सारे पदार्थों में यह विचित्र गुण पाया जाता है। गिल्बर्ट के बाद भी और वैज्ञानिकों को बिजली से संबंधित जानकारी प्राप्त नहीं हुई। परंतु कुछ वर्ष के बाद एक इटालियन वैज्ञानिक एले साल्ड्रो वोल्टा ने एक उपकरण बनाकर विद्युत की हल्की सी धारा को उत्पन्न करने में सफलता पाई थी।

संयुक्त राज्य अमेरिका के एक दार्शनिक एवं वैज्ञानिक बेंजामिन फ्रेंकलिन ने वर्ष 1752 ईस्वी में यह सिद्ध कर दिया था कि आकाश में प्रकाश की चमक बिजली का ही एक रूप होती है। उन्होंने अपने परीक्षण के दौरान वर्षा वाले दिन एक पतंग को उड़ाया एवं उसकी डोर को निचले सिरे पर एक चाबी के सहायता से बांध दी। उन्होंने जब चाबी को छुआ तब उन्हें बिजली का झटका महसूस हुआ।

वर्ष 1865 ईस्वी में फ्रांस के एक वैज्ञानिक जॉर्ज लेक्लानसे ने अपने परीक्षण के द्वारा एक गीली बैटरी बनाई जिसकी सहायता से बिजली का उत्पन्न किया जा सकता था। उन्होंने अमोनियम क्लोराइड के एक घोल में कार्बन एवं जस्ता की छड़े डुबाई एवं उन्हें आपस में एक तार से जोड़ दिया। इसे जोड़ने से उन्हें बिजली का झटका महसूस हुआ।

एक अंग्रेजी वैज्ञानिक माइकल फैराडे ने एक विचार दिया की जब विद्युत एक चुंबक पैदा कर सकती है तब वहीं विद्युत चुंबकीय विद्युत पैदा क्यों नहीं कर सकती है। अपनी इसी विचारधारा को सत्य में बदलने के लिए उन्होंने वर्ष 1831 ईस्वी में अपने एक प्रयास द्वारा चुंबकीय विद्युत की धारा उत्पन्न की एवं उन्होंने उन्नति के एक नए युग को जन्म दिया।

सभी वैज्ञानिकों ने मिलकर फैराडे के इस खोज को और अधिक परिश्रम द्वारा मानव जाति के लिए और अधिक उपयोगी बनाया। वैज्ञानिकों ने बिजली से चलने वाली और भी कई सारे यंत्रों की खोज की। एडिसन ने पहला सबसे बड़ा बिजली पैदा करने वाला यंत्र बनाया एवं उन्होंने ही बिजली का बल्ब भी तैयार किया। उनके द्वारा निर्माण किया गया यह यंत्र 1 मील दूर स्थित किसी क्षेत्र में बिजली पहुंचा सकता था।

वर्ष 1820 ईस्वी में विलियम स्टार्जन ने पहला विद्युत मोटर का आविष्कार किया एवं उन्होंने ही पहला विद्युत चुंबक तैयार किया। पहला सफल जनरेटर वर्ष 1867 ईस्वी में जर्मनी के एक वैज्ञानिक सीमांस ने बनाया था।

इस प्रकार हम यह देख सकते हैं कि बिजली की खोज जब से हुई तब से लेकर आधुनिक युग में जब बिजली की उपयोगिता में निरंतर वृद्धि हुई है वहां तक वही विद्युत के उत्पादन के वैकल्पिक साधनों की खोज क्षेत्र में कई सारे व्यापक कार्य किए गए हैं। चूँकि अब तक विद्युत क्षेत्र की सभी उपलब्धियां संतोषजनक रही परंतु बिजली की निरंतर बढ़ती हुई अनिवार्यता एवं उपयोगिता आदि को देखते हुए इन क्षेत्रों में निरंतर अनुसंधानओ की आवश्यकता होती है।

निष्कर्ष – (Conclusion )

मैं आशा करता हूं कि इस पोस्ट के जरिए आपको यह पता चल गया होगा कि बिजली की खोज किसने की एवं कैसे की? यदि आपको आज का हमारा यह पोस्ट पसंद आया हो तो इसे लाइक करें शेयर करें ताकि और भी अधिक लोगों तक यह जानकारी पहुंच सके। आपके मन में विद्युत संबंधित यदि कोई भी सवाल हो तो नीचे हमारे कमेंट बॉक्स के माध्यम से आप हमसे पूछ सकते हैं हम आपके सवालों के जवाब देने का प्रयास करेंगे। धन्यवाद….

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