महाभारत की रचना किसने की | Mahabharat ki rachna kisne ki ?

आज की इस पोस्ट में हम जानेंगे कि महाभारत की रचना किसने की थी ( Mahabharat ki rachna kisne ki ) व महाभारत ग्रंथ से जुड़ी और भी कई महत्वपूर्ण बातों पर चर्चा करेंगे।

महाभारत एक पवित्र ग्रंथ है। जो कि प्राचीन समय से ही काफी प्रसिद्ध है। लोग इसके बारे में काफी अधिक जानना पसंद करते हैं क्योंकि इसमें आपको एक से बढ़कर एक ज्ञान की बातें जानने को मिलती है। महाभारत में श्री कृष्ण द्वारा गीता का ज्ञान दिया गया है जिसे संसार का सबसे बड़ा ज्ञान माना गया है।

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महाभारत की रचना किसने की ? ( Mahabharat ki rachna kisne ki ?

महाभारत की रचना ” महर्षि वेदव्यास” ( Vyasa ) द्वारा किया गया था। इस ग्रंथ की रचना करने में वेदव्यास जी को 3 वर्ष का समय लगा था । महाभारत की रचना महर्षि वेदव्यास जी ने ही की थी इसका प्रमाण स्वयं महाभारत के आदिपर्व के प्रथम अध्याय के श्लोक क्रमांक 62 से 83 में दिया गया है।

महाभारत की रचना कब हुई थी ?

मित्रों महाभारत की रचना कब हुई इसका कोई भी सही प्रमाण नही है। और आज के समय में हम जिस महाभारत का लिखित रूप देखते और पढ़ते हैं उसका विकास लगभग आज से हजार वर्ष पहले के कालखंड में हुआ था। महाभारत की रचना कब हुई इसका कोई सन तय नहीं है।

महाकाव्य की मूल कहानी के रचनाकार ” भाट सारथी ” थे जिन्हें ” सूत “के नाम से भी जाना जाता था। भाट सारथी ही योद्धाओं के संग रणभूमि में जाते थे और रणभूमि में जो भी घटनाएं घटित होती थी, उनको काव्य का रूप देकर लिखते थे।

महाभारत रचयिता महर्षि वेदव्यास जी के बारे में जानकारी –

महर्षि वेदव्यास जी का जन्म हस्तिनापुर में हुआ था। महर्षि वेदव्यास जी के पिता का नाम पराशर व माता का नाम सत्यवती था। महर्षि वेदव्यास जी ने कई सारे ग्रंथ की रचना की जैसे महाभारत ,श्री भगवत गीता, अष्टादश पुराण आदि

ऐसा माना जाता है कि महाभारत की रचना करने के लिए महर्षि वेदव्यास जी को भगवान ब्रहमा जी ने कहा था और महर्षि वेदव्यास जी ने महाभारत में जो भी घटनाएं लिखी हैं वह श्री गणेश जी की सहायता से लिखी थी।

महाभारत की रचना कैसे हुई –

महाभारत एक महाकाव्य है जो पूरी दुनिया में सबसे लंबी कहानी वा इतिहास की सबसे क्रुर युद्ध में से एक मानी जाती है। महाभारत पांडव और कौरव की कहानी है। जिससे महाभारत की शुरुआत हुई थी। जिस तरह लोग रामायण को देखना और सुनना पसंद करते हैं उसी तरह महाभारत भी लोगों को काफी अधिक देखना और सुनना पसंद है। महाभारत की रचना महर्षि वेदव्यास द्वारा की गयी।

एक शक्तिशाली व्यक्ति वेदव्यास –

महर्षि वेदव्यास जी सौ कौरवो एवं पांच पांडवों के दादा थे। कौरवों के पिता का नाम धृतराष्ट्र एवं पांडवों के पिता पांडू थे। और यह गुरुवंश में विचित्रवीर्य के पुत्र थे। माना जाता है कि वेदव्यास का जीवनकाल काफी लंबा था उन्होंने अपने बच्चों और अपने नाती पोतों का पालन किया था। महर्षि वेदव्यास जी बचपन से ही एक अद्वितीय बालक थे।

महाकाव्य लिखने की प्रेरणा –

महर्षि वेदव्यास जी बचपन से ही हिमालय पर जाकर तपस्या करते थे और एक बार जब महर्षि वेदव्यास जी हिमालय पर ध्यान कर रहे थे तो वहाँ भगवान ब्रहमा प्रगट हुए और वहीं पर ही भगवान ब्रहमा जी ने महर्षि वेदव्यास जी को महाभारत लिखने की सलाह दी ।

महाकाव्य लिखने में आई दुविधा –

महर्षि वेदव्यास जी को यह ज्ञात था कि महाभारत लिखना एक कठिन कार्य है क्योंकि वह महाभारत की कहानियों की जटिलता को काफी अच्छे से जानते थे इसलिए उन्हें महाभारत लिखने के लिए किसी की मदद की आवश्यकता लेनी चाही। उसी समय भगवान ब्रहमा जी ने महर्षि वेदव्यास जी को श्री गणेश जी से मदद लेने की सलाह दी।

महाकाव्य लिखने में गणेश जी की भूमिका –

भगवान ब्रहमा जी के कहने पर महर्षि वेदव्यास जी ने श्री गणेश जी की आराधना की जिससे श्री गणेश जी प्रकट हुए और उन्होंने महाकाव्य लिखने में वेदव्यास जी की मदद की।

वेदव्यास जी ने इस महाकाव्य को जल्द से जल्द लिखने के लिए श्री गणेश जी के सामने शर्त रखी और कहा कि वह इस महाकाव्य को श्री गणेश जी को सुनाएंगे और गणेश जी को उसे जल्दी-जल्दी लिखना होगा। इस बात को सुनकर गणेश जी ने भी एक शर्त रखी और कहा कि यदि वह महाकाव्य को सुनाते सुनाते बीच में रुक गए तो वह इस साहित्य को लिखना उसी समय बंद कर देंगे।

गणेश जी ने लिखना आरंभ किया –

गणेश जी ने काव्य को लिखना आरंभ किया और महर्षि वेदव्यास जी महाकाव्य को गणेश जी को सुनाते थे इस बीच जब वेदव्यास जी को थकान महसूस होती थी तो वह भगवान गणेश जी को कुछ ऐसे कठिन कविताएं सुना देते थे जिनको समझने में उन्हें समय लगता था। और इस बीच वेदव्यास जी अपनी थकान को मिटा लेते थे।

टूट हुआ दांत –

जब गणेश जी महाकाव्य को लिख रहे थे तो लिखते -लिखते अचानक वह जिस मोर पंख का उपयोग कर रहे थे वह टूट गया क्योंकि वह भगवान गणेश जी के लिखने की गति से मेल नहीं खा रहा था लेकिन इसके बाद भी भगवान गणेश जी ने लिखना जारी रखा। उन्होंने लेख लिखने के लिए अपने एक दांत को तोड़ दिया और उसी से ही लिखना आरंभ कर दिया।

और इसी वजह से भगवान गणेश जी को अधिकांश कचित्र में एक ही दांत के साथ देखा गया है क्योंकि इस महाकाव्य को लिखने के लिए उन्होंने अपने एक दांत को उपयोग में ले लिया था ।

महाभारत का युद्ध कब और किस युग मे हुआ था।

महाभारत का युद्ध द्वापर युग में हुआ था, और आज भी यह युद्ध जहां पर हुआ था वह स्थल भारत एवं उनके पड़ोसी देशों में स्थित है। आज के विद्यमान महाभारत को एक ऐतिहासिक घटना मानते है।

भारतवर्ष के एक महान गणितज्ञ आर्यभट्ट ने महाभारत के युद्ध का समय लगभग 4100 ई. पूर्व तय किया है। महाभारत के युद्ध का यह समय आर्यभट्ट ने उस समय के ग्रहों की स्थिति के आधार पर किया था । और इस स्थिति के आधार पर महाभारत युद्ध की समय सीमा आज के कई विद्यमान सत्य मानते हैं।

महाभारत से जुड़े पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण प्रश्न –

1. महाभारत की रचना किसने और कब की ?

महाभारत की रचना महर्षि वेदव्यास जी ने की थी और इस महाभारत की रचना आज से लगभग 4100 ई. पूर्व द्वापर युग में हुई थी

2. महाभारत कितने वर्ष पहले हुआ था ?

महाभारत की घटना आज से लगभग 3137 ई. पूर्व में हुआ था।

3. महाभारत के नायक अर्जुन के पितामह कौन थे?

महाभारत के नायक अर्जुन के पितामह दादा देवदत्त थे

4. महाभारत में जीत किसकी हुई ?

महाभारत में पांडवों की जीत हुई क्योंकि दोनों पक्षों में लोगों की मृत्यु होने के बाद भी पांचो पांडव जीवित रहे और कौरवों की अपेक्षा पांडव को कम क्षति हुईं।

5. महाभारत का युद्ध कौन से युग में हुआ था ?

महाभारत का युद्ध द्वापर युग में हुआ था

6. महाभारत में सबसे पहले कौन मरा था ?

महाभारत में सबसे पहले दुर्योधन मरा था ।

7. महाभारत का सबसे शक्तिशाली योद्धा कौन था ?

साँचा महाभारत का सबसे शक्तिशाली योद्धा था।

8. अर्जुन के पुत्र का क्या नाम था ?

अर्जुन के पुत्र का नाम बभ्रुवाहन था।

9. महाभारत किस भाषा मे लिखा गया है।

महाभारत संस्कृति भाषा मे लिखा गया है।

10. महाभारत का पुराना नाम क्या है?

महाभारत का पुराना नाम जयसहिंता है।

निष्कर्ष –

दोस्तों इस पोस्ट के माध्यम से आपने जाना की महाभारत की रचना किसने की (Mahabharat ki rachna kisne ki ) वा महाभारत से जुड़े महत्वपूर्ण जानकारी हासिल की ।

दोस्तो आशा करते हैं आपको यह पोस्ट पसंद आई होगी और महाभारत से जुड़ी यह जानकारी अच्छी लगी होगी यदि आपको यह जानकारी अच्छी लगी हो तो इसे मित्रों के साथ शेयर जरूर करें तथा यदि आपके मन में महाभारत से जुड़ी कोई प्रश्न हो तो नीचे कमेंट के माध्यम से हम आपके प्रश्नों के उत्तर अवश्य दें धन्यवाद..

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