Radio ka avishkar kisne kiya। Full Details In Hindi 2021

Radio ka avishkar kisne kiya : दोस्तों रेडियो के बारे में हम सभी जानते हैं,क्योंकि रेडियो की शुरुआत काफी लंबे समय पहले ही हुई थी।

आधुनिक काल में रेडियो की सक्रियता कम हो गई है परंतु इसके बावजूद हम कह सकते हैं कि रेडियो ने विभिन्न प्रकार के जानकारियों एवं न्यूज़ से अवगत करने में हमारी काफी मदद की है।

कई बार हमारे मन में सवाल उठता है। कि Radio ka avishkar kisne kiya तो हम बता दें कि इस लेख में हम Radio ka avishkar kisne kiya से लेकर इसकी संपूर्ण जानकारी आपको अवगत करवाने वाले हैं।

यदि आप रेडियो से संबंधित जानकारियों के बारे में जानना चाहते हैं तो आप इस पोस्ट को पूरा पढे जिससे आपको Radio से जुड़ी सभी प्रकार के जानकारियां मिल सके।

रेडिओ का आविष्कार किसने और कब किया ? ( Radio ka avishkar kisne kiya )

रेडियो जिसकी शुरुआत आज से लगभग 90 साल पहले हुई । इसका सफर भारत में पुराना होता चला जा रहा है। लेकिन इसकी लोकप्रियता कम नहीं हुई ।

रेडियो एक ऐसा उपकरण है जिसके माध्यम से हर वर्ग के लोगों के लिए सूचना जानकारी से लेकर मनोरंजन तक सभी प्रोग्रामों का प्रसारण किया जाता है।

रेडियो का आविष्कार 1885 ईस्वी में मारकोनी नाम वेज्ञानिक ने किया था। रेडियो का आविष्कार करने वाले मारकोनी ने ऑडियो सिग्नल को सबसे पहली बार इटली में भेजा। वाकई में यह एक बड़ा आविष्कार था जिसे लोगों ने सुनकर भविष्य के इतिहास की कल्पना भी शुरू कर दी।

जुलाई 1923 ई. में भारत में रेडियो प्रसारण की बात कही गई थी, जब भारत पर ब्रिटिश का राज था, उसी समय 30 जुलाई 1927 ई. को मुंबई में इंडियन ब्रॉडकास्टिंग कंपनी के नाम से रेडियो का प्रसारण किया गया।

इसके पश्चात 26 अगस्त 1927 को कोलकाता में रेडियो का प्रसारण शुरू हुआ। 8 जून 1936 को रेडियो को एक नया नाम मिला जिसे हम ‘ऑल इंडिया रेडियो’ या ‘आकाशवाणी’ के नाम से भी जानते हैं।

Radio ka avishkar kisne kiya
Radio ka avishkar kisne kiya

रेडियो के आविष्कार के क्षेत्र में मारकोनी की भूमिका:

रेडियो का आविष्कार गुगलेल्मो मारकोनी ने दिसंबर 1895 में किया था, मारकोनी इटली के एक विश्व प्रसिद्ध भौतिक शास्त्री हैं। मार्कोनी को बेतार के तार का जन्मदाता के रूप में भी जाना जाता है।

मारकोनी ने संचार क्रांति के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण खोज की जिसके बाद 1979 में उन्हें भौतिकी के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

मार्कोनी बचपन से ही विज्ञान के प्रयोगों में लगे रहते थे। वह इन प्रयोगों में इतना व्यस्त रहते थे कि उन्हें खाने की भी फुर्सत नहीं होती थी।

जब मारकोनी की उम्र लगभग 20 वर्ष की थी तब उन्हें हाइनरिख रूडॉल्फ हर्टज द्वारा खोजी गई रेडियो तरंगों के बारे में जानकारी प्राप्त हुई ।

उसी समय से उन्होंने सोचा कि वह इन तरंगों को संदेश ले जाने के लिए भी प्रयोग करेंगे । उस समय संदेशों को तार की सहायता से मोर्स कोड प्रयोग में लेकर भेजा जाता था।

मारकोनी की सफलता का विस्तार –

मारकोनी ने रेडियो के क्षेत्र में काम करना शुरू किया। मारकोनी ने बेतार के तार द्वारा एक स्थान से दूसरे स्थान तक अपने संदेशों को भेजने वाला एक उपकरण दुनिया के सामने लाया। सफलता मिलने के पश्चात गुगलेल्मो इस क्षेत्र में और बढ़ते गए।

सन् 1897 में वे 12 मील तक रेडियो संदेश भेजने में सफल हुए। इस प्रकार मारकोनी का नाम पूरे देश में छा गया।

मानव का चिरसंचित सपना ‘बिना तार के ही संदेश भेजने वाला यंत्र ‘ का निर्माण हो गया। इसके पश्चात मारकोनी ने अपनी कंपनी ‘The Wireless Telegraph and Signal Company’ भी आरंभ की। जिसे बाद में मारकोनी कंपनी के नाम से भी जाना गया।

Radio ka avishkar kisne kiya
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मनोरंजन के रूप में रेडियो का आविष्कार।

रेडियो के आविष्कार के पश्चात मनोरंजन के रूप में रेडियो का प्रचलन बहुत अधिक बढ़ गया था। रेडियो की मांग वक्त के साथ बढ़ती चली जा रही थी।

घरों का एक कोना रेडियो के लिए सुरक्षित रखा जाने लगा था। उस समय के रेडियो काफी बड़े व भारी भरकम के होते थे।

आवाज भी इतनी कम होती थी कि कुछ दूर तक ही सुनाई देती थी, इसी प्रकार रेडियो का दायरा और बढ़ता गया , साथ ही रेडियो सिलोन का भी प्रसार होने लगा । सीलोन की लोकप्रियता के कारण ‘ऑल इंडिया रेडियो’ की नई राह खोजनी पड़ी, वो राह विविध भारती का राह था।

रेडियो के रूप में विविध भारती की शुरुआत:

विविध भारती की शुरुआत आज से लगभग 62 से 63 वर्ष पहले अर्थात 1957 ई. में हुआ था। जो आज तक देश की सुरीली धड़कन बना हुआ है।

धीरे-धीरे तकनीकी बढ़ता गया पर रेडियो की लोकप्रियता आज भी बरकरार है। तभी तो रेडियो आज घर के कोने से निकलकर हमारे मोबाइल में अपनी जगह बना चुका है।

समय एवं रेडियो का संबंध –

आधुनिक युग में जब लोगों के पास वक्त की कमी होती जा रही है वैसे-वैसे लोग का ऑडियो की तरफ झुकाव बढ़ता जा रहा हैं।

वैसे प्राचीन समय की बात करें तो रेडियो के प्रचलन उनका मुख्य कारण यह था कि वहां चौपाल पर काफी लोग बैठकर रेडियो सुना करते थे और धीरे-धीरे ऐसा ही समय आज हमारे सामने आ रहा है।

आज लोगों के दिनचर्या में व्यस्तता के कारण ऐसे समय में रेडियो की अहमियत बढ़ रही है। इंटरनेट का इस दौर में सोशल नेटवर्किंग के जरिए टीवी का क्रेज कम होता जा रहा है। विविध भारती के कारण रेडियो का मांग खासतौर से लोगों के बीच बढ़ रहा है ।

विविध भारती –

रेडियो के प्रचलन का कारण इंटरनेट के जरिए विविध भारती लोगों के बीच ज्यादा से ज्यादा पहुंच रहा है। विविध भारती की अहमियत लोगों के बीच बिल्कुल अलग है ।

यह एक ऐसा चैनल है जिसे लोग काफी पसंद करते हैं क्योंकि इसमें लोगों को अपने मनपसंद कार्यक्रम चुनने का विकल्प भी होता है।

विविध भारती की मुख्य ममता सिंह कहती है कि मैं अपने आप को बहोत खुशकिस्मत समझती हूं कि मुझे एक ऐसा माध्यम मिला जिसके जरिए मैं लाखों लोगों के दिलों तक पहुंच सकती हूं। मुझे बहुत खुशी होती है जब ‘रेडियो ऑन डिमांड ‘ के जरिए कई श्रोताएं मुझे कॉल करते हैं।

रेडियो से जुड़े हुए महत्वपूर्ण तथ्य –

1. विश्व में पहला रेडियो स्टेशन साल 1918 में न्यूयार्क से प्रारंभ हुआ था।

2. दुनिया में सर्वप्रथम रेडियो प्रसारण 24 दिसंबर 1906 को कैनेडियन वैज्ञानिक रेगीनॉल्ट फेससेंड़े ने किया था।

3. भारत में पहला रेडियो प्रसारण कोलकाता की एक क्लब से सन 1927 किया गया था ।

4. देश का पहला निजी FM चैनल 2001 में आरंभ की गई थी जिसका नाम रेडियो सिटी बेंगलुरु था।

5. 9 अगस्त 1942 रेडियो प्रेस के माध्यम से गांधी जी ने अंग्रेज भारत छोड़ो का नारा दिया था।

6. दुनिया का पहला रेडियो स्टेशन 1918 में ली द फॉरेस्ट ( lee the forest ) ने न्यूयॉर्क के haribrji इलाके से प्रसारित किया था।

निष्कर्ष ( Conclusion )

दोस्तों इस पोस्ट के माध्यम से अपने जाना की Radio ka avishkar kisne kiya एवं Radio से जुड़ी सभी प्रकार की जानकारियां हासिल की ।

दोस्तों आशा करते हैं आपको हमारी पोस्ट पसंद आई होगी क्योंकि हमने इसमें Radio ka avishkar kisne kiya और इससे जुड़ी कई प्रकार की जानकारियों को उपलब्ध करवाया है।

यदि आपको पोस्ट पसंद आई तो इसे सोशल मीडिया पर ज्यादा से ज्यादा शेयर करें। यदि रेडियो से जुड़ी किसी भी प्रकार के प्रश्न हो तो नीचे कमेंट अवश्य करें।

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